यूपी के करहल में बीजेपी ने अखिलेश को क्यों दिया ‘जीजा जी’ वाला सरप्राइज, सीट का समीकरण समझिए

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उत्तर प्रदेश में उपचुनाव (UP Bypoll) होने जा रहा है. इस बीच चर्चा में है वह हॉट सी, जहां से अखिलेश यादव विधायक थे. उनके इस्तीफ़े के बाद खाली हुई इस सीट पर करहल में उप-चुनाव (Karhal By Election) हो रहा है. मैनपुरी ज़िले की करहल सीट पर सपा सबसे मज़बूत पार्टी है लेकिन फिर भी यादव परिवार के सदस्य को टिकट देकर बीजेपी ने सपा को चुनौती देने की पूरी कोशिश की है. क्या है करहल का समीकरण, समझिए हमारे संवाददाता रणवीर की इस ख़ास रिपोर्ट में.

करहल में फूफा-भतीजे की लड़ाई

यूपी का यादवलैंड यानी मैनपुरी और आसपास के इलाके में बीते तीन दशक से मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार का वर्चस्व माना जाता रहा है. उसी यादवलैंड के करहल विधानसभा सीट पर इस बार फूफा-भतीजे में लड़ाई होने वाली है. करहल सीट पर अखिलेश यादव ने अपने भतीजे और लालू प्रसाद यादव के दामाद तेज प्रताप यादव को मैदान में उतारा है. वहीं तेज प्रताप को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने उनके फूफा अनुजेश यादव को टिकट दिया है. अनुजेश सपा सांसद और अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के बहनोई हैं.

 25 मार्च 2019 अनुजेश यादव जब बीजेपी में शामिल हुए थे तो साले धर्मेंद्र यादव ने उनसे रिश्ता तोड़ने का ऐलान कर दिया था. अब वही अनुजेश यादव जब चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतरेंगे, तो उनके साले धर्मेंद्र यादव उनके ख़िलाफ़ खड़े दिखाई देंगे.

करहल सीट का सियासी समीकरण जानिए

  • करहल में कुल वोटर्स की संख्या 3,82,378 है
  • ⁠इनमें यादव वोटर्स लगभग 1 लाख 30 हज़ार हैं
  • ⁠अनुसूचित जाति 60 हज़ार
  •  ⁠शाक्य 50 हज़ार
  • ⁠राजपूत 30 हज़ार
  • ⁠पाल बघेल 30 हज़ार
  • ⁠मुस्लिम 25 हज़ार
  •  ⁠ब्राह्मण 20 हज़ार
  •  ⁠लोधी 20 हज़ार
  •  ⁠बनिया 15 हज़ार के क़रीब हैं
  • करहल में यादव वोटर को निर्णायक माना जाता है

करहल में 22 सालों से सपा का कब्जा

करहल सीट पर पिछले 22 सालों पर समाजवादी पार्टी का क़ब्ज़ा है. साल 2002 में पहली बार बीजेपी के सोबरन सिंह करहल से चुनाव जीते लेकिन वो भी बाद में सपा में ही शामिल हो गए. इसके बाद सपा के इस किले को कोई ढहा नहीं सका. साल 2022 में तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ख़ुद यहां से चुनाव जीते थे.

सपा के गढ़ में जनता का आशीर्वाद भतीजे को मिलेगा या फिर उनके फूफा के साथ जाएगा तो वक्त आने पर ही पचा चलेगा.  फूफा-भतीजे की इस लड़ाई की चर्चा उप चुनाव में खूब हो रही है.

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